कोई दोस्त है न रकीब है,तेरा शहर कितना अजीब है. यहाँ किसका चेहरा पढा करूं,यहाँ कौन इतना करीब है.मैं किसे कहूं मेरे साथ चल,यहाँ सब के सर पे सलीब हैवह जो इश्क था वह जूनून था,ये जो हिज्र है ये नसीब है.तुझे देख कर मैं हूं सोचता ,तू हबीब है या रक़ीब है,तेरा शहर कितना [...]
कोई दोस्त है न रकीब है,
तेरा शहर कितना अजीब है.
यहाँ किसका चेहरा पढा करूं,
यहाँ कौन इतना करीब है.
मैं किसे कहूं मेरे साथ चल,
यहाँ सब के सर पे सलीब है
वह जो इश्क था वह जूनून था,
ये जो हिज्र है ये नसीब है.
तुझे देख कर मैं हूं सोचता ,तू हबीब है या रक़ीब है,
तेरा शहर कितना [...]